मारे गाँव का पुराना प्राथमिक विद्यालय 🏫✨
यह वही विद्यालय है जहाँ से मेरी शिक्षा की शुरुआत हुई थी।
गाँव के बीचोंबीच बना यह पुराना प्राथमिक विद्यालय कभी बच्चों की हँसी-खुशी से गूंजता रहता था। मिट्टी के फर्श पर बिछी दरी, दीवारों पर लिखे हिंदी के अक्षर, और खिड़कियों से आती ठंडी हवा — सब कुछ आज भी यादों में ताज़ा है।
यह विद्यालय अब बंद हो चुका है, क्योंकि इसे नई इमारत में दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है।
लेकिन इस पुराने स्कूल की हर ईंट, हर कोना, आज भी उन सुनहरे दिनों की कहानी कहता है।
मैंने सन 1993 से 1999 तक कक्षा 1 से 5 तक यहीं अध्ययन किया।
उस समय हमारे विद्यालय के प्रधानाध्यापक मास्टर खिवांराम जी बिजरानिया थे — एक सच्चे गुरु, सख्त भी और बेहद दयालु भी। उन्होंने न केवल पढ़ाई सिखाई, बल्कि जीवन के संस्कार भी दिए।
आज भी अगर कभी इन सर से मुलाकात हो जाती है,
तो वही
सम्मान और वही आदर दिल में अपने आप आ जाता है।
और वो
हल्का-सा डर, जो बचपन में उनके सामने लगता था,
वो आज भी वैसा ही महसूस होता है। ऐसा लगता है जैसे फिर वही बचपन लौट आया हो… वही मास्टर जी की मुस्कान, वही सादगी, वही अपनापन।
समय भले आगे बढ़ गया हो, लेकिन उस छोटे-से विद्यालय की यादें आज भी दिल में ज्यों की त्यों बसती हैं ❤️