राजियासर की तलैया : प्रकृति और परंपरा का संगम
यह है राजियासर गाँव की प्राचीन तलैया, जो हर वर्ष बरसात के मौसम में लबालब भर जाती है और अपने सौंदर्य से पूरे क्षेत्र को हरियाली और शीतलता से भर देती है। गाँव के लोग इसे स्नेहपूर्वक “ढाब” के नाम से भी पुकारते हैं। यह केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि गाँव की जीवनरेखा और सामूहिक यादों का प्रतीक है।
तलैया के किनारे एक कुंई (well) भी स्थित है, जिसका पानी अत्यंत मीठा और स्वच्छ माना जाता है। कहा जाता है कि इस कुंई के जल में तलैया के पवित्र जल का ही प्रभाव है, जो इसे और भी स्वादिष्ट बनाता है। बरसात के बाद जब ढाब पानी से भर जाता है, तो इसके आस-पास का वातावरण एकदम मनमोहक हो उठता है — जैसे धरती ने हरियाली की चादर ओढ़ ली हो।
सावन तीज के पावन पर्व पर गाँव की महिलाएँ और युवतियाँ सजे-धजे वस्त्रों में यहाँ आती हैं। वे पारंपरिक गीत गाती हैं, झूले झूलती हैं और प्रकृति के इस सौंदर्य के बीच हर्षोल्लास और श्रद्धा से उत्सव मनाती हैं। उनके गीतों की मधुर ध्वनि और हँसी की गूंज से यह पूरा स्थान जीवन से भर उठता है।
वास्तव में, यह तलैया केवल एक जलाशय नहीं — बल्कि गाँव की संस्कृति, स्नेह और उत्सवों की धड़कन है।
बहुत अच्छा लिखा, सावन तीज के त्यौहार पर गाँव की लड़कियाँ इस तलैया के किनारे आती है और झुला झूलती है।
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