गाँव का सूर्यास्त और मौर का दृश्य
शाम ढल रही है… सूरज अपनी सुनहरी लाली बिखेरते हुए क्षितिज के पार जा रहा है।
गाँव की छतों पर हल्की हवा चल रही है, और उसी पल एक मौर (मोर) अपनी अदाओं से इस नज़ारे को और भी जीवंत बना देता है।
सूर्य की किरणें उसके पंखों पर पड़ती हैं तो ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपने रंग उसी में समेट दिए हों।
गाँव का यह दृश्य केवल आँखों को ही नहीं, दिल को भी सुकून देता है —
जहाँ एक ओर ढलता सूरज दिन की थकान मिटाता है, वहीं दूसरी ओर मौर का सौंदर्य जीवन की खुशियों का एहसास कराता है।





