गाँव की सड़क : यादों और अपनापन से जुड़ी डगर
गाँव की सड़क को देखते ही मन अनायास ही गाँव की ओर खिंचा चला जाता है। जैसे ही इस मार्ग की मिट्टी की खुशबू हवा में घुलती है, वैसा एहसास कहीं और नहीं मिलता। यह वही सड़क है जो सालासर से मोमासर के बीच गुजरती है — एक ऐसा रास्ता जो न केवल दो स्थानों को जोड़ता है, बल्कि गाँव के लोगों की भावनाओं और जीवन की कहानियों को भी आपस में पिरोता है।
यह तस्वीर मोमासर से सालासर की ओर जाते हुए गाँव के प्रवेश छोर की है। जैसे ही कोई इस रास्ते से होकर गाँव में प्रवेश करता है, उसे एक अलग ही शांति, अपनापन और परिचितपन का अहसास होता है — मानो गाँव की मिट्टी अपने लोगों को पहचान लेती हो।
इस सड़क के बाईं ओर प्राथमिक विद्यालय स्थित है, जहाँ से अनेक बच्चों ने अपनी शिक्षा यात्रा की शुरुआत की है। वहीं दाहिनी ओर गाँव का श्मशान घाट है — एक ऐसा स्थान जो जीवन की अंतिम सच्चाई की याद दिलाता है। यह दोनों ही स्थल जीवन के दो पहलुओं का प्रतीक हैं — शुरुआत और अंत, जो इसी सड़क से होकर एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
यह गाँव की सड़क केवल रास्ता नहीं, बल्कि स्मृतियों की पगडंडी है — जिस पर बचपन की हँसी, खेतों की महक, और लोगों के कदमों की गूँज आज भी सुनाई देती है।

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