Tuesday, December 25, 2012

गाँव का कुँवा


राजियासर का ऐतिहासिक कुँवा : गाँव की अमूल्य धरोहर

राजियासर गाँव का यह कुँवा बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। बताया जाता है कि इसका निर्माण करीब दो सौ साल पहले एक बनिए (व्यापारी) द्वारा करवाया गया था। समय चाहे जितना बदल गया हो, लेकिन यह कुँवा आज भी मजबूती से खड़ा है और गाँव की पहचान बना हुआ है।

इतना पुराना होने के बावजूद, आज भी इसकी मोटर ठीक तरह से काम करती है, जो अपने आप में एक आश्चर्य की बात है। यह कुँवा सिर्फ राजियासर ही नहीं, बल्कि आसपास के तीन गाँवों को भी पानी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका पानी थोड़ा नमकीन है, फिर भी लोग इसे आदर और गर्व से देखते हैं — क्योंकि यह गाँव के इतिहास और मेहनत की निशानी है।

आज के समय में ऐसे कुँवे बहुत कम देखने को मिलते हैं। राजियासर का यह कुँवा सचमुच एक धरोहर है — जो पीढ़ियों से गाँव की प्यास बुझा रहा है और अब भी उतनी ही शांति से अपनी सेवा दे रहा है।

इस कुँए की एक और खासियत यह है कि कभी भी किसी ने इसमें आत्महत्या करने की कोशिश नहीं की, और न ही इससे जुड़ी कोई दुर्घटना हुई है। यही बात इसे और भी पवित्र, सुरक्षित और शुभ प्रतीक बनाती है।

वास्तव में, यह कुँवा केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि गाँव के विश्वास, इतिहास और सकारात्मकता का प्रतीक है।

Monday, December 24, 2012

गाँव के मंदिर


गाँव के मंदिर : श्रद्धा और परंपरा का संगम

गाँव में कई प्राचीन और पूजनीय मंदिर हैं, जो यहाँ की आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। इनमें सबसे प्रमुख है श्री हनुमान (बालाजी) मंदिर, जिसका निर्माण करीब 200 वर्ष पहले करवाया गया था। समय के साथ यह मंदिर गाँव के लोगों की श्रद्धा का केंद्र बन गया। पहले इस मंदिर में केवल सफेदी और हल्की मरम्मत का काम ही होता था, लेकिन अब पुराने मंदिर को तोड़कर नया भव्य बालाजी मंदिर बनाया गया है, जिससे यह स्थल और भी सुंदर व आकर्षक दिखाई देता है। इस मंदिर के पुजारी श्री अमर दास स्वामी जी हैं, जो पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करवाते हैं।

दूसरा प्रमुख मंदिर शिव मंदिर है, जिसका निर्माण लगभग 50–60 वर्ष पहले हुआ था। हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ भव्य आयोजन किया जाता है, जिसमें गाँव और आस-पास के कई लोग शामिल होते हैं। इस दिन मंदिर परिसर में भक्ति, संगीत और रौनक का सुंदर माहौल देखने को मिलता है।

इन दोनों मंदिरों की उपस्थिति से गाँव का वातावरण आध्यात्मिकता और शांति से भरा रहता है — जहाँ हर सुबह आरती की ध्वनि और श्रद्धा की भावना पूरे राजियासर में गूँजती है।

Sunday, December 23, 2012

स्व.ठा.श्री किशन सिंह राठौड़ की हवेली


राजियासर गाँव की पुरानी हवेली

राजियासर गाँव की यह हवेली भी अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखती है। यद्यपि यह 200 वर्ष पुरानी तो नहीं कही जा सकती, परंतु लगभग 150 वर्ष से अधिक पुरानी अवश्य है। इस भव्य हवेली का निर्माण स्व. ठा. श्री किशन सिंह राठौड़ (पुत्र स्व. ठा. श्री बिन्जराज सिंह राठौड़) ने करवाया था।

यह हवेली गाँव के उत्तरी छोर पर, उतरादाबास में स्थित है। समय के साथ यह हवेली गाँव की वास्तुकला और इतिहास का प्रतीक बन गई है। आज भी इसमें कुछ परिवारों का निवास है, जो इसकी विरासत को जीवित रखे हुए हैं।

हालाँकि अब यह हवेली जर्जर होने लगी है — विशेषकर पीछे की ओर की दीवारों की ईंटें टूटने लगी हैं, और संरचना धीरे-धीरे ढहने की कगार पर पहुँच रही है।

यह हवेली राजियासर गाँव के गौरव और इतिहास की एक अमूल्य निशानी है, जिसे संरक्षण की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें।

Saturday, December 22, 2012

राजकीय उच्च माध्यमिक विध्यालय


राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चक राजियासर मीठा

राजियासर गाँव का यह विद्यालय लगभग 150 वर्ष पुराना है। पहले यह विद्यालय आठवीं तक था, लेकिन लगभग 17–18 वर्ष पूर्व इसे बारहवीं कक्षा तक उन्नत किया गया।

विद्यालय की यह प्राचीन इमारत आज भी गाँव की शिक्षा यात्रा का साक्षी बनी हुई है। वर्षों से यहाँ अनेक शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन को संवारने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वर्तमान में कार्यरत कुछ अनुभवी शिक्षक हैं —
श्री भंवर सिंह राठौड़ (PTI) तथा श्री ओंकार राम जाखड़ (Ex-BSF), जिनकी लगन और अनुशासन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर कई विद्यार्थी आज विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं, और गाँव का नाम गर्व से रोशन कर रहे हैं।
विद्यालय में कुछ ऐसे शिक्षक भी रहे हैं जिनकी शिक्षण शैली और समर्पण को आज भी स्नेहपूर्वक याद किया जाता है —
स्व. मानाराम जी, श्री रामनिवास जी भिवसर, श्री भंवरलाल जी तोलियासर, श्री जुगलाल जी, तथा श्री रोहितास जी

इन सभी के योगदान से यह विद्यालय गाँव की शैक्षिक पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुका है।

Friday, December 21, 2012

गाँव का तालाब


गाँव का तालाब (जोहड़ा)

राजियासर गाँव का यह तालाब, जिसे स्थानीय भाषा में “जोहड़ा” कहा जाता है, लगभग 200 वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि इसका निर्माण रतनगढ़ के एक बनिए द्वारा करवाया गया था।

समय के साथ इसकी दीवारों में दरारें जरूर आ गई हैं, लेकिन यह तालाब आज भी भीतर से मज़बूत है। इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि इसका पानी कभी पूरी तरह सूखता नहीं, चाहे गर्मी का मौसम ही क्यों न हो — थोड़ा-बहुत पानी हमेशा बना रहता है।

हालाँकि कभी-कभी बरसात न होने के कारण यह सूख भी जाता है, फिर भी यह गाँव के जीवन और इतिहास का अहम हिस्सा बना हुआ है।
कई बार यहाँ दुर्भाग्यवश दुर्घटनाएँ भी हुई हैं, जब तैरने के प्रयास में 3–4 लोगों की जान चली गई थी।

यह तालाब गाँव के बाहरी छोर पर स्थित है, और आज भी राजियासर की पहचान और विरासत के रूप में जाना जाता है।

Thursday, December 20, 2012

स्व.ठा.श्री माल सिंह जी राठौड़ की हवेली




राजियासर गाँव की पुरानी हवेली

राजियासर गाँव की यह हवेली लगभग 200 वर्ष पुरानी है। समय के लंबे अंतराल के बावजूद यह हवेली आज भी अपने पुराने स्वरूप में लगभग वैसी ही दिखाई देती है
हाँ, इसकी दीवारों पर उम्र के निशान जरूर नजर आते हैं, लेकिन टूट-फूट बहुत कम हुई है, जो इसकी मजबूत बनावट और उत्कृष्ट निर्माण कला को दर्शाती है।

इस हवेली का निर्माण स्व. ठा. सा. श्री माल सिंह राठौड़ (पुत्र स्व. ठा. सा. श्री नौल सिंह राठौड़) द्वारा करवाया गया था।
आज भी इस हवेली में कुछ परिवारों का निवास है, जो इसे जीवित परंपरा और पारिवारिक इतिहास के रूप में संजोए हुए हैं।

यह हवेली राजियासर गाँव की सांस्कृतिक विरासत और स्थापत्य कला की पहचान बनी हुई है।

Wednesday, October 17, 2012

गाँव का कुँवा































गाँव के कुएँ के अंदर का नज़ारा

राजियासर गाँव के इस पुराने कुएँ के अंदर का दृश्य वाकई अद्भुत है। जब कोई इसके भीतर झाँकता है, तो नीचे तक साफ़ पानी दिखाई देता है — मानो समय वहीं थम गया हो।
इतना पुराना होने के बावजूद कुएँ की दीवारें अब भी मजबूत हैं, और अंदर का वातावरण ठंडा व शांत रहता है।

गहराई से झलकता पानी इस बात का प्रमाण है कि यह कुआँ गाँव की जीवनधारा रहा है।
आज भी कई लोग इसे देखकर पुराने दिनों की यादों में खो जाते हैं, जब इसी कुएँ से गाँव की प्यास बुझती थी।





Sunday, August 12, 2012

सूर्यास्त



























गाँव का सूर्यास्त और मौर का दृश्य

शाम ढल रही है… सूरज अपनी सुनहरी लाली बिखेरते हुए क्षितिज के पार जा रहा है।
गाँव की छतों पर हल्की हवा चल रही है, और उसी पल एक मौर (मोर) अपनी अदाओं से इस नज़ारे को और भी जीवंत बना देता है।

सूर्य की किरणें उसके पंखों पर पड़ती हैं तो ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपने रंग उसी में समेट दिए हों।
गाँव का यह दृश्य केवल आँखों को ही नहीं, दिल को भी सुकून देता है
जहाँ एक ओर ढलता सूरज दिन की थकान मिटाता है, वहीं दूसरी ओर मौर का सौंदर्य जीवन की खुशियों का एहसास कराता है।

गाँव का फोटो


 छत से लिया हुआ गाँव का फोटो.................
ये फोटो गाँव के उत्तरी छोर का है.......
<>><><><>उतरादाबास <>><><><><

Friday, August 10, 2012

भारत निर्माण राजीव गाँधी सेवा केंद्र



























हमारे गाँव का  भारत निर्माण राजीव गाँधी सेवा केंद्र ....................

गाँव के मध्य में स्थित है....................

गाँव का मध्य (गुवाड़)



























यह हमारे गाँव का मध्य है , जहाँ बस स्टैंड,ग्राम पंचायत ,IT CENTRE  और दुकानें (SHOPS) है ! 
गाँव के मध्य को वैसे "गुवाड़" के नाम से भी जाना जाता है I ...........

Sunday, August 5, 2012

मौर



























गाँव से लिया हुआ  मौर का चित्र.....................................


दूब

















दूब में पानी डालते हुए की फोटो........