राजियासर का ऐतिहासिक कुँवा : गाँव की अमूल्य धरोहर
राजियासर गाँव का यह कुँवा बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। बताया जाता है कि इसका निर्माण करीब दो सौ साल पहले एक बनिए (व्यापारी) द्वारा करवाया गया था। समय चाहे जितना बदल गया हो, लेकिन यह कुँवा आज भी मजबूती से खड़ा है और गाँव की पहचान बना हुआ है।
इतना पुराना होने के बावजूद, आज भी इसकी मोटर ठीक तरह से काम करती है, जो अपने आप में एक आश्चर्य की बात है। यह कुँवा सिर्फ राजियासर ही नहीं, बल्कि आसपास के तीन गाँवों को भी पानी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका पानी थोड़ा नमकीन है, फिर भी लोग इसे आदर और गर्व से देखते हैं — क्योंकि यह गाँव के इतिहास और मेहनत की निशानी है।
आज के समय में ऐसे कुँवे बहुत कम देखने को मिलते हैं। राजियासर का यह कुँवा सचमुच एक धरोहर है — जो पीढ़ियों से गाँव की प्यास बुझा रहा है और अब भी उतनी ही शांति से अपनी सेवा दे रहा है।
इस कुँए की एक और खासियत यह है कि कभी भी किसी ने इसमें आत्महत्या करने की कोशिश नहीं की, और न ही इससे जुड़ी कोई दुर्घटना हुई है। यही बात इसे और भी पवित्र, सुरक्षित और शुभ प्रतीक बनाती है।
वास्तव में, यह कुँवा केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि गाँव के विश्वास, इतिहास और सकारात्मकता का प्रतीक है।
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